केदारनाथ मंदिर उत्तरखंड पांचवा ज्योतिर्लिंग

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केदारनाथ मंदिर उत्तरखंड पांचवा ज्योतिर्लिंग

पावन धार्मिक स्थल केदारनाथ मंदिर भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से पांचवा ज्योतिर्लिंग के साथ साथ चार धाम में से एक मुख्य धाम हिमालय की गोद उत्तराखंड के रूद्र प्रयाग में लगभग 8 वीं सदी में स्थापित प्राचीन मंदिर है | केदारनाथ मंदिर को पञ्च केदार के नाम से भी जाना जाता है | इस मंदिर का निर्माण पांडव वंश के राजा जनमेजय द्वारा करवाया गया था | वर्तमान केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्वार आदि गुरु शंकराचार्य जी के द्वारा करवाया गया था | कुछ लोगों के अनुसार इस मंदिर के ठीक पीछे मंदिर का निर्माण पांड्वो द्वारा कराया गया था जो वक्त के साथ नष्ट हो गया | यह मंदिर तीनों ओर से विशाल पहाड़ियों की श्रंखलाओं केदारनाथ पर्वत, खर्चकुंड और भरतकुंड से घिरा हुआ है, इसके साथ ही यहाँ पांच पवित्र नदियों मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी का संगम स्थित है |

केदारनाथ मंदिर उतराखंड –

केदारनाथ मंदिर में भगवान् शिव की बैल के पीठ की आक्रति के शिवलिंग की पूजा की जाती है | यहाँ सर्दियों के मौसम में भारी बर्फ़बारी और बरसात के मौसम में जबरदस्त पानी होता है, इसकी वजह से यह मंदिर सिर्फ 6 महीनों के लिए ही खुलता है | 6 महीनो के लिए मंदिर बंद होने पर महादेव के पंचमुखी प्रतिमा को पालकी से उखीमठ नामक स्थान पर ले जाते हैं | इन 6 महीनों में महादेव के दर्शन उखीमठ में ही प्राप्त होते हैं | मान्यता है की केदारनाथ मंदिर में दर्शन कर लेने से समस्त पाप और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है |

मंदिर परिसर –

केदारनाथ मंदिर नदी के बीचों बीच कात्युहरी शैली में निर्मित लगभग 6 फीट ऊँचे चबूतरे पर विशाल भूरे रंग के शिलाखंडो को आपस में इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़कर बनाया गया विशाल मंदिर है | इस मंदिर की छत का निर्माण एक विशाल पत्थर के द्वारा किया गया है | केदारनाथ मंदिर की लम्बाई 187 फीट, चौड़ाई 85 फीट और ऊंचाई 85 फीट है, जिसमे इस मंदिर की दीवारें 12 फीट मोटी मजबूत पत्थरों के द्वारा बनायीं गयी हैं |

केदारनाथ मंदिर को तीन भागों में विभक्त किया गया है – पहला गर्भगृह, दूसरा दर्शन मंडप ( सभी भक्तों द्वारा एक साथ पूजा अर्चना की जाती है ) तीसरा और आखिरी सभामंडप ( यहाँ सभी श्रद्धालु एक साथ एकत्रित होते हैं ) | केदारनाथ मंदिर में महादेव के अलावा रिद्धि सिद्धि के साथ भगवान् गणेश, माता पार्वती, माता लक्ष्मी के साथ विष्णु भगवान्, भगवान् श्री कृष्ण, माता कुंती, द्रोपदी, युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव की पूजा अर्चना भी की जाती है | केदारनाथ मंदिर में पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण को ही रखा जाता है |

आरती व दर्शन का समय –

केदारनाथ मंदिर भक्तो के लिए सुबह छ बजे से शाम के चार बजे तक खुलता है उसके बाद शाम को पांच से साढ़े आठ बजे तक खुला रहता है | जिसमे भगवान् शंकर की सुबह एक आरती फिर 3 से 4 बजे तक एक आरती और आखिर रात में 7 से 8 बजे तक आरती होती है | मंदिर के खुलने और बंद होने का समय मुहूर्त के अनुसार होता है जो मुख्यतः निम्न हैं – मंदिर बंद होने का मुहूर्त लगभग 15 नबम्बर से पहले ( वृश्चिक संक्रांति से 2 दिन पहले ) और मंदिर खुलने का मुहूर्त वैशाख के महीने में ( 13 से 14 अप्रैल के लगभग ) |

मंदिर के निर्माण से जुडी कथा –

मंदिर के निर्माण को लेकर कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं जिनमे से मुख्यतः पांड्वो और ऋषि नर व नारायण की कथा को सर्वमान्य माना जाता है जो निम्न प्रकार हैं –

ऋषि नर व नारायण की कथा –

हिमालय पर्वत के केदार पर्वत पर भगवान् विष्णु के अवतार माने जाने वाले महातपस्वी महामुनि ऋषि नर व नारयण शिवलिंग स्थपित करके महादेव की तपस्या किया करते थे | ऋषियों की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें वरदान दिया और वरदान मांगने को कहा तब ऋषियों ने महादेव से उस शिवलिंग में सदैव साक्षात् रूप से निवास करने को कहा | महादेव ने तथास्तु कहा और उसी शिवलिंग में अंतर्ध्यान हो गए यही स्थान केदार पर्वत पर स्थित हैं |

पांड्वो की कथा –

पांड्वो द्वारा कौरवों को युद्ध में पराजित करदेने के बाद पांड्वो के उपर भ्रातहत्या का पाप लगा था | पांडव इस पाप मुक्ति पाने के लिए महादेव से आशीर्वाद लेना चाहते थे | पांडव महादेव के दर्शन को जब काशी गए तो महादेव पांड्वो से नाराज होने के कारण हिमालय पर आ पहुंचे | पांडव लगनशील होने के कारण महादेव के पीछे पीछे हिमालय पर आ पहुंचे और जब महादेव ने पांड्वो को देखा तो बैल का रूप धारण करके पशुओं के झुण्ड में शामिल हो गए | पांड्वो ने जब पशुओं का झुण्ड देखा तो उन्हें शक हुआ की इसमें महादेव भी हैं |

सत्य जानने के लिए भीम ने विशाल शरीर को दो पहाड़ो के ऊपर फैला लिया जिसके नीचे से सभी जानवर निकल गए मगर महादेव न निकले और बैल रुपी महादेव अंतर्ध्यान होने लगे तब भीम ने बैल रुपी महादेव के पीठ के हिस्से हो पकड लिया जिससे यहाँ बैल के पीठ रुपी शिवलिंग की पूजा की जाती है | पांड्वो द्वारा महादेव को प्राप्त करलेने के कारण महादेव ने पांड्वो को आशीर्वाद दिया और पाप से मुक्ति दिलाई | पांड्वो ने महादेव से इस शिवलिंग में साक्षत रूप से निवास करने की प्रार्थना की तभी महादेव यहाँ साक्षात् रूप से निवास करते हैं |

पञ्च केदार की मान्यता –

माना जाता है जब महादेव बैल के रूप में अंतर्ध्यान होने लगे थे तब भीम द्वारा उस बैल की पीठ को पकड लेने से केदारनाथ में महादेव की बैल की पीठ के रूप की शिवलिंग की पूजा की जाती है | उसी तरह बैल रुपी महादेव के शरीर के अंग कुछ दूसरी जगहों पर पहुंचे थे | उपरी धड काठमांडू यहाँ पशुपति नाथ की पूजा की जाती है, भुजाएं तुंगनाथ, मुख रुद्रनाथ, नाभि मद्मेश्वर और जटा कल्पेश्वर इन पांचो जगहों को मिलाकर ही केदारनाथ को पञ्च केदार कहा जाता है |

पर्यटन स्थल –

केदारनाथ मंदिर के अलावा भी आप उत्तराखंड में कई सारे दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं –

  • भैरवनाथ मंदिर
  • तुंगनाथ मंदिर
  • रुद्रनाथ मंदिर
  • मद्महेश्वर मंदिर
  • कल्पेश्वर मंदिर
  • वासुकी ताल
  • चोरवरी ताल
  • डोरियल ताल
  • मयाली दर्रा
  • गौरीकुंड
  • आदि गुरु शंकराचार्य समाधी
  • उखीमठ
  • अगस्त मुनि
  • सोनप्रयाग
  • चंद्रशिला
  • गुप्तकाशी
  • तिर्युनिनारायण मंदिर

आवागमन –

केदारनाथ मंदिर आप हवाई, रेल और सडक तीनों मार्गों द्वारा आसानी से जा सकते हैं –

हवाई मार्ग द्वारा – हवाई मार्ग द्वारा केदारनाथ जाने के लिए सबसे नजदीक लगभग 239 किमी दूर जॉली ग्रांट एरपोर्ट, देहरादून में स्थित है | यहाँ से आप बस या कार के द्वारा केदारनाथ आसानी से जा सकते हैं |

रेल मार्ग द्वारा – रेल मार्ग द्वारा केदारनाथ पहुँचने के लिए आप रेलमार्ग द्वारा केदारनाथ से लगभग 223 किमी की दूरी पर ऋषिकेश पहुंचकर वहां से बस या कार के द्वारा केदारनाथ जा सकते हैं |

सडक मार्ग द्वारा – सडक मार्ग द्वारा केदारनाथ आप ऋषिकेश होते हुए बस या अपने वाहन द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं |

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Sushant Mohite

I’m a professional Cyber Security Consultant & Web Developer with 15 years of experience. | Director of EQUITEOS INFOTECH PRIVATE LIMITED | IT Consultant @ HPN Marathi News | Active Member @ Digital Media Editor Journalist Association Maharashtra | Legal Advisor @ The Maharashtra Media Persons and Media Institutions | Former Cyber Security Consultant @ Cyber Crime Pune| Former Cyber Security Consultant @ MAC Delhi | Co-Owner @ Dainik Shodh Marathi ( DS Marathi)

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