मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश दूसरा ज्योतिर्लिंग

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मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश दूसरा ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन मंदिर भगवान् शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में से दूसरा ज्योतिर्लिंग है इसके साथ यहाँ स्थित माता भ्रामराम्बा देवी का मंदिर प्रमुख 18 शक्ति पीठों में से एक है | यह मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ और दक्षिण के कैलाश की उपाधि प्राप्त है | यह मंदिर नाल्ल्मालाई की पहाड़ियों पर कृष्णा नदी के दायें किनारे श्री शैलम पर्वत पर आंध्रप्रदेश में स्थित एक प्राचीन मंदिर है | यह मंदिर लगभग 2 हेक्टेयर की जगह में 499 फीट और 28 फीट लम्बी और 600 फीट ऊँची दीवारों से घिरा हुआ है | इस मंदिर के नाम के अनुसार मल्लिका माता पार्वती और अर्जुन भगवान शंकर को संबोधित किया गया है |

मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्रप्रदेश –

यहाँ पर स्थित माता भ्रामराम्बा देवी का मंदिर देश के प्रमुख 18 शक्ति पीठों में से एक प्रमुख शक्ति पीठ है | इसके निर्माण के पीछे मान्यता है की जब शंकर जी माता पार्वती के शव को लेकर घूम रहे थे तव माता सती के उपरी होंठ यहाँ आकर गिरे थे तभी इस शक्ति पीठ की स्थापना की गई थी

मंदिर परिसर –

मौजूदा मल्लिकार्जुन मंदिर एक विशाल परिसर में स्थित है जिसमे मल्लिकार्जुन और माता भ्रामराम्बा के मंदिरों के साथ कई सारे उप मंदिर, खम्भे, मंडप और झरने बने हुए हैं | इसमें नन्दीमंडपा, वीरासीरोमंडपा, मल्लिकार्जुन, भ्रामराम्बा देवी का मंदिर पूर्व से पश्चिम दिशा की तरफ एक सीधी पंक्ति में स्थित हैं | इसके साथ कुछ छोटे मंदिर जैसे वृद्ध मल्लिकार्जुन, सहस्त्र लिंगेस्वर, अर्ध नारीश्वर, वीरमद, उमा महेश्वर पांच मंदिरों का समूह जिसे पांडव नथिस्टा तथा इन नौ मंदिरों की पंक्ति जिसे नव ब्रह्मा मंदिर कहा जाता है |

मंदिर का इतिहास –

मल्लिकार्जुन मंदिर का इतिहास सातवाहन वंश के साम्राज्य के समय से मिलता है | पुल्लुमावी के नासिक अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार इस मंदिर का इतिहास पहली शताब्दी से मिलता है | इसके अलावा पल्लव, चालुक्य, काकतीय, रेड्डी आदि राजाओं द्वारा इस मंदिर में कई विकास के कार्यों के प्रमाण मिलते हैं |

14 वीं सदी में प्रलयवम रेड्डी ने कृष्णा यानि की पातालगंगा से मंदिर तक सीढ़ीदार मार्ग का निर्माण करवाया था जहाँ अब पक्की सडक बनी हुई है | विजयनगर साम्राज्य के राजा हरिहर ने यहाँ मंदिर के मुख्यमंडपम और दक्षिण गोपुरम का निर्माण करवाया था | 15 वीं शताब्दी में कृष्णदेव राय ने राजगोपुरम का निर्माण करवाया था  तथा इस मंदिर के उत्तरी गोपुरम का निर्माण सन 1667 में छत्रपति शिवाजी महाराज के द्वारा करवाया गया था | आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर के भ्रमण के दौरान ही शिवनंदी लहरी पुस्तक की रचना की थी |

मंदिर से जुडी कहानी –

इस मंदिर से जुडी एक प्राचीन पौराणिक कहानी प्रचलित है की एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती दोनों के पुत्रों कार्तिकेय और गणेश जी में विवाह को लेकर कलेश उत्पन्न हो गया तब दोनों अपने माता पिता के पास पहुंचे और अपनी समस्या कह सुनाई | तब कलेश को खत्म करने के लिए माता पार्वती ने कहा जो पहले प्रथ्वी का चक्कर लगाएगा उसका विवाह पहले होगा | ऐसा सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर परिक्रमा करने को निकल गए मगर गणेश जी थे मोटे और वाहन चूहा तब उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और माता पिता के ही सात चक्कर लगा कर माता पिता की परिक्रमा से प्रथ्वी की परिक्रमा के मिलने वाले फल के अधिकारी बन कर शर्त जीत गए |

इससे प्रसन्न होकर माता पार्वती व् शंकर भगवान् ने गणेश जी का विवाह करवा दिया | जब कार्तिकेय जी लौटे तो उन्होंने देखा की गणेश जी का तो विबाह हो गया है | तब वह दुखी होकर वहां से क्रौंच पर्वत पर चले गए | कार्तिकेय जी को मनाने के लिए नारद जी को भेजा गया मगर कार्तिकेय जी नहीं माने तब पुत्र प्रेमवश माता पार्वती स्वं कार्तिकेय जी को मनाने पहुंची और शंकर भगवान् भी ज्योतिर्लिंग के रूप में यहाँ प्रकट हो गए | तभी से इस मंदिर को मल्लिकार्जुन मंदिर कहा जाने लगा कहा जाता है पुत्र की खोज में आज भी माता पार्वती प्रत्येक पूर्णिमा और शंकर भगवान् प्रत्येक अमावस्या को यहाँ आते हैं |

मंदिर से जुडी एक और कथा –

एक और कथा प्रचलित है की क्रौंच पर्वत के पास ही एक राजा चन्द्रगुप्त की राजधानी थी जिसकी पुत्री किसी संकट की बजह से क्रौंच पर्वत पर जा कर निवास करने लगी इस पुत्री के पास एक काले रंग की गाय थी जिसकी सेवा व् देखभाल वह स्वं किया करती थी मगर अचानक से कोई चोर गाय का दूध धोने लगा जिससे राजा की पुत्री परेशान रहने लगी की गाय का दूध जाता कहा है |

एक दिन राजा की पुत्री ने देखा की चोर गाय का दूध धो रहा उसे पकड़ने के लिए वह जैसे ही चोर के पास पहुंची उसने देखा की वहां एक शिवलिंग के अलावा कुछ भी नहीं है | शिवलिंग को देखकर वह प्रसन्न हुई और इस जगह पर एक विशाल मंदिर का निर्माण करवाया जो आज मल्लिकार्जुन मंदिर के नाम से जाना जाता है |

आरती व दर्शन का समय –

मल्लिकार्जुन मंदिर सुबह 5:30 से दोपहर 01:00 बजे तक खुला रहता है इसके बाद शाम को 06:00 से 10:00 बजे तक खुला रहता है | इस मंदिर में आरती सुबह 05:15 से 06:30 तक होती है उसके बाद शाम को 05:20 से 06:00 तक होती है | प्रसाद के रूप में यहाँ पर लड्डू का प्रसाद अर्पित किया जाता है |

अमानती घर –

इस मंदिर में फोटो निकालना व कैमरा और मोबइल अंदर लेके जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है | इसलिए आप अपना सामान जैसे बैग, मोबाईल, कैमरा और कोई इलेट्रोनिक सामान अमानती घर में जमा करा सकते है | जिसके लिए प्रति बैग 10 रुपए, प्रति मोबाईल और कैमरा 5 रुपए का शुल्क लिया जाता है | आप अपने जूते चप्पल भी जूता घर में जमा करा सकते है जिसके लिए आपको प्रति जोड़ी 2 रुपए देने होते हैं |

ठहरने की व्यवस्था –

मंदिर के पास ही भक्तो को ठहरने के लिए कई सारे गेस्ट हाउस, धर्मशाला और छोटे छोटे मकान बने हुए है | इसके साथ ही शिवरात्रि के मेले के समय भीड़ ज्यादा होने के कारण मंदिरों में भी भी रुकने की व्यवस्था की जाती है |

आस पास पर्यटन स्थल –

  • भ्रमराम्बा देवी का मंदिर दूरी 1 किमी
  • पातालगंगा दूरी 1 किमी
  • शिखारम स्थल दूरी 8 किमी
  • श्री शैलम धाम दूरी 14 किमी
  • मलैला तीर्थम दूरी 58 किमी
  • अक्का महादेवी गुफा दूरी 10 किमी
  • उमा महेश्वरम दूरी 87 किमी
  • नागार्जुन सागर उद्धान दूरी 60 किमी
  • बैर्लुती जंगल कैंप दूरी 96 किमी
  • तिर्वल म्युजियम दूरी 1 किमी
  • साक्षी गणपति का मंदिर दूरी 3 किमी
  • फलधारा पंचधारा दूरी 4.5 किमी
  • हट्केश्वरम दूरी 4.5 किमी
  • कैलाश द्वारम स्थल दूरी 5 किमी
  • कदलीवनम गुफा दूरी 22 किमी
  • शैलेश्वरम धाम दूरी 60 किमी
  • गुप्त मल्लिकार्जुन धाम दूरी 45 किमी
  • नागार्जुन सागर डैम दूरी 166 किमी

आवागमन –

मल्लिकार्जुन मंदिर के लिए आप हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग तीनो के द्वारा ही सफर कर सकते है –

हवाई मार्ग द्वारा – श्री शैलम मंदिर के सबसे निकट 137 किमी की दूरी पर हैदराबाद का राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय एअरपोर्ट है | यहाँ से आप बस के द्वारा आसानी से श्री शैलम आ सकते हैं |

रेल मार्ग द्वारा – श्री शैलम से 62 किमी की दूरी पर मर्कापुर रोड रेलवे स्टेशन है यहाँ से आप बस और टैक्सी के द्वारा आसानी से मंदिर तक आ सकते हैं |

सड़क मार्ग द्वारा – सड़क मार्ग द्वारा श्री शैलम पूरी तरह से बड़े बड़े प्रमुख शहरों से जुडा हुआ है इसलिए आप आसानी से बस या कार द्वारा यहाँ पहुँच सकते है | श्री शैलम के लिए आसपास से लगातार सरकारी और प्राइवेट बस की सुविधा उपलब्ध है |

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Sushant Mohite

I’m a professional Cyber Security Consultant & Web Developer with 15 years of experience. | Director of EQUITEOS INFOTECH PRIVATE LIMITED | IT Consultant @ HPN Marathi News | Active Member @ Digital Media Editor Journalist Association Maharashtra | Legal Advisor @ The Maharashtra Media Persons and Media Institutions | Former Cyber Security Consultant @ Cyber Crime Pune| Former Cyber Security Consultant @ MAC Delhi | Co-Owner @ Dainik Shodh Marathi ( DS Marathi)

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