बाबा गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर

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बाबा गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर
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बाबा गोरखनाथ मंदिर उत्तर-प्रदेश के गोरखपुर नामक नगर में स्थित एक बहुत प्रशिद् मंदिर है इसके नाम पर ही इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा । बाबा गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान महन्त श्री बाबा योगी आदित्यनाथ जी है जो वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर भी है । यहाँ पर मकर संक्रांति का विशेष महत्व है जिससे इस अवसर पर यहाँ पर एक माह तक चलने वाले विशाल खिचड़ी मेला का आयोजन किया जाता है । हिन्दू धर्म, अध्यात्म व साधना के अंदर अनेक प्रकार के मत व सप्रंदायो में नाथ संप्रदाय एक प्रमुख संप्रदाय है। भारत में स्थित सभी नाथ संप्रदाय के मंदिरों तथा मठों की रखवाली यहीं से की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि नाथ संप्रदाय के गुरू सच्चिदानंद शिव के साक्षत् स्वरूप श्री गोरक्षनाथ जी  प्रत्येक युग में अलग-अलग जगहों पर आविर्भूत हुए थे। यह स्थान निम्न है-

  • सतयुग में पेशावर जो कि पंजाब में स्थित है।
  • त्रैतायुग में गोरखपुर जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  • द्वापर युग में हरमुज जो कि द्वारिका के पास स्थित है।
  • कलयुग में गोरखमधी यह सौराष्ट्र में स्थित है।

गुरू जी चारों युगो में विघमान अमर महायोगी सिद्व महापुरूष के रूप में विश्व में भी कई स्थानो पर अपने योग के द्वारा उन स्थानों को क्रतार्थ किया था।

गोरखनाथ मंदिर का निर्माण

इस मठ का नाम गोरखनाथ महयुगीन सतं गोरखनाथ के नाम पर रखा गया । यह एक बहुत प्रसिद्व सतं व् ग्रथों के सुप्रसिद्व लेखक थे, जो व्यातक रूप से भारत में यात्रा करते थे । प्राचीन नाथ संप्रदाय की स्थापना गुरू मत्स्येंद्रनाथ द्वारा की गयी थी। यह मठ एक अत्यतं बड़े परिसर में जहाँ पर गुरू जी के द्वारा तपस्या की जाती थी स्थित है । उन्हें ही श्रद्वांजलि समर्पित करते हुए इस मंदिर की स्थापना की गई थी । इन्होनें अपने तपस्या के तरीके श्री मत्स्येंद्रनाथ जी के द्वारा प्राप्त किये थे । गोरखनाथ जी अपने गुरू के बहुत प्रिय शिष्य थे जिससे दोनों ने मिलकर हठ योग स्कूलों की स्थापना करवाई गई थी।

यह स्कूल योग अभ्यास के लिए बहुत अच्छे माने जाते थे । ऐसी मान्यता है,कि जो भी व्यक्ति गोरखनाथ चालीसा 12 बार जप करता है वह दिव्य ज्योति या चमत्कारी लौ के साथ धन्य हो जाता है। आज हम जिस विशाल और भव्य मंदिर के दर्शनकर हर्ष व शांति का अनुभव करते है। वह ब्रहंलिन महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज जी की कृपा से है। वर्तमान समय में पीठाधीर अवैघनाथ जी महाराज के संरक्षण में गोरखनाथ मंदिर को विशाल आकार भव्य प्रांगण व पवित्रता प्राप्त होती रही है।

मंदिर का इतिहास –

हमारे देश में मुस्लिमों के शासन के प्रारंभिक चरण से ही मंदिर में यौगिक साधना की लहर पूरे एशिया में फैल चुकी थी । विक्रमीय 11 वीं शताब्दी के द्वितीय चरण में गोरखनाथ मंदिर का जीर्णाधन या नवनिर्माण करवाया गया था । इस मंदिर के नवनिर्माण में मंदिर के महंतो ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है । विक्रमी 14 वीं सदी में भारत के मुस्लमान सम्राट अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में इस मठ को नष्ट किया गया था । इस मंदिर के साधक योगीयों को बलपूर्वक निष्कासित कर दिया गया था ।

इस मठ के नष्ट हो जाने के बाद एक बार फिर इसका निर्माण किया गया और यह फिर से यौगिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बन गया था । 17 वीं शताब्दी में मुगल शासक औंरगजेब ने अपनी धार्मिक कटरता के कारण इसे दो बार नष्ट किया । इसके बाद त्रेता युग में शिव गोरक्ष द्वारा यहाँ एक अखंण्ड ज्योति को प्रज्वलित किया गया जो आज भी जलती रहती हैं । यह अखंण्ड ज्योति हमें अध्यात्मिक व धार्मिक शक्ति प्रदान करती है जो मंदिर के अंतरवर्ती भाग में स्थित है ।

मंदिर परिसर –

लगभग 42 एकड़ में फैला यह विशाल मंदिर अपनी भव्यता के लिए सुप्रसिद्ध है | इस मंदिर का रूप 9 आकार में अनेक परिस्थितियों में समय समय पर बदला जाता रहा है । आज के समय में इस मंदिर की रमणीयता बहुत कीमती आध्यत्मिक संपत्ति है । इस मंदिर को भव्यपूर्ण बनाने का श्रेय यहाँ के संतो व भारतीय संस्कृति के कर्णधार मंहत दिग्विजयनाथ जी व उनके शिष्य गोरक्षपीठाघीश्रवर मंहत अवैद्यनाथ जी महाराज को जाता है । इन दोनों के प्रयासों के कारण ही हमें वर्तमान समय में इस प्रकार के मंदिर की भव्यता देखने का मौका मिला है । इस मंदिर में गोरखनाथ जी द्वारा पृज्जवलित अग्नि से प्राप्त अखण्ड धूना भी अत्यधिक प्रसिद्ध है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भीतरी कक्ष की भव्य वेदी पर शिव के अवतार व अमरनाथ योगी श्री गुरू गोरखनाथ जी महाराज की सफेद संगमरमर के द्वारा निर्मित भव्य मूर्ति स्थापित है । यह एक दिव्य योगमूर्ति है। इस मूर्ति के कुछ पास में ही उनकी चरण पादुकाओं को भी रखा गया है । इस मंदिर की परिकृमा के समय आपको कई देवाताओं की मूतियों के दर्शन प्राप्त होते है । परिक्रमा ने भगवान शिव व गणेश जी की मांगलिक मूर्ति है।

मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ –

इस मंदिर की अलग-अलग देवी-देवता स्थापित है। मंदिर परिसर के पश्चिम कौने में काली माँ एवं उत्तर में कालभैरव और उत्तर पाश्रव में शीतला माता का मंदिर स्थापित है। इस मंदिर के थोडे़ से निकट में भगवान शिव का एक भव्य शिवलिंग का मंदिर है। मंदिर परिसर के उत्तर वर्ती दिशा में राधा कृष्ण का मंदिर में भी है। इनके अलावा मंदिर में संतोषी माता, श्री राम दरवार, नवग्रह देवता, विष्णु जी, हनुमान मंदिर, भीमसेन मंदिर, मंहत दिग्विजयनाथ जी आदि कई भगवानों के छोटे-छोटे मंदिर स्थापित है। इस मंदिर की भव्यता से भक्तों के हृदय में श्रद्धा का भाव प्रसारित कर देता है। इस मंदिर एक कुण्ड भी पाया जाता है | जिसे भीम कुण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा यज्ञशाल एवं गोशाला आदि भी स्थित है।

आरती व दर्शन का समय –

बाबा गोरखनाथ मंदिर सुबह तीन बजे से रात आठ बजे तक खुला रहता है जिसमे प्रतिदिन 3 बार आरती क्रमशः सुबह 3 से 4 बजे ब्रह्म वेला आरती, दोपहर में 11 बजे मध्यान्ह भोग आरती और शाम के 6 से 8 बजे तक सायं काल आरती की जाती है |

दर्शनीय स्थल –

मंदिर परिसर के अंदर ही कई दर्शनीय स्थल मौजूद है, जो निम्न प्रकार हैं :

  • अखंड ज्योति
  • अखंड धूना
  • देव मूर्तियाँ
  • माँ दुर्गा मंदिर
  • हनुमान जी का मंदिर
  • भीम सरोबर
  • महाबली भीमसेन मंदिर
  • योगिराज ब्रह्म्नाथ जी, गंभीरनाथ जी, दिग्विज्यनाथ जी एवं अवेधनाथ जी की मूर्तियाँ
  • मठ गोरक्षपीठाधीश्वर का निवास
  • महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन
  • श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ
  • गुरु श्रीगोरक्षनाथ चिकित्सालय
  • गुरु श्रीगोरक्षनाथ आयुर्वेद महाविद्यालय एवं धर्मार्थ

इन सबके अलावा आप कुछ और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कर सकते है :

  • गीता प्रेस
  • आरोग्य मंदिर
  • इमामबाड़ा
  • मुंशी प्रेमचंद्र उद्धान
  • सूर्य कुंड मंदिर
  • कुश्मीवन
  • विनोद वन
  • गीता वाटिका

प्रमुख त्यौहार –

बाबा गोरखनाथ के मंदिर में मकर संक्रांति, होली, गुरु पूर्णिमा, नाग पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी, साप्ताहिक पुण्यतिथि और विजयदशमी का त्यौहार बहुत ही धूम धाम से हर्षो उल्लास के साथ मनाये जाते हैं |

आवागमन –

गोरखनाथ मंदिर में दर्शन के लिए आप गोरखपुर हवाई, रेल और सडक तीनों मार्गों से ही आसानी से आ सकते हैं –

हवाई मार्ग द्वारा – हवाई मार्ग द्वारा आने के लिए आप गोरखपुर एयरपोर्ट पर आ कर आसानी से टैक्सी से मंदिर पहुँच सकते हैं |

रेल मार्ग द्वारा – गोरखपुर उत्तर पूर्व रेलवे जोन का मुख्यालय है, जिससे यह रेल मार्ग द्वारा देश के बड़े बड़े शहरों से जुडा हुआ है | आप रेल मार्ग द्वारा आसानी से गोरखपुर पहुँच कर टैक्सी से मंदिर पहुँच सकते हैं |

सडक मार्ग द्वारा – सड़क मार्ग द्वारा भी आप आसानी से बस, कार के द्वारा गोरखपुर पहुँच सकते हैं |

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Sushant Mohite

I’m a professional Cyber Security Consultant & Web Developer with 15 years of experience. | Director of EQUITEOS INFOTECH PRIVATE LIMITED | IT Consultant @ HPN Marathi News | Active Member @ Digital Media Editor Journalist Association Maharashtra | Legal Advisor @ The Maharashtra Media Persons and Media Institutions | Former Cyber Security Consultant @ Cyber Crime Pune| Former Cyber Security Consultant @ MAC Delhi | Co-Owner @ Dainik Shodh Marathi ( DS Marathi)

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