उनाव बलाजी सूर्य मंदिर की मान्यता व् पहुँचने का तरीका

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उनाव बलाजी सूर्य मंदिर की मान्यता व् पहुँचने का तरीका

उनाव बलाजी सूर्य मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया जिले के उनाव क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर अपने साथ कई किवदंतियों को समेटे हुए है । इस मंदिर में सूर्य देवता की मूर्ती के साथ सूर्य देवता का यंत्र भी स्थापित है । यह मंदिर दतिया और झाँसी से लगभग समान दूरी 17 किमी पर स्थित है इसलिए आप दतिया व् झाँसी दोनों जगह से आसानी से इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं | आइये इस मंदिर से जुडी कुछ रोचक बाते विस्तार से जानते है –

उन्नाव बालाजी सूर्य मंदिर –

ऐसा कहा जाता है कि एक काछी समाज के व्यक्ति के पास एक बहुत प्यारी गाय थी, यह गाय बहुत अद्भूत थी । गाय उनाव क्षेत्र से कुछ दूर जाकर प्रतिदिन एक निश्चित स्थान पर अपना दूध देती थी । काछी इस बात से कई दिनों तक तो अपरिचित रहा लेकिन जब उसे इस बात का पता चला तो उसे बड़ा अचम्भा हुआ । गाय के मालिक को लगा शायद गाय किसी रोग से ग्रसित है । उनाव क्षेत्र में पहले कई ऐसे व्यक्ति रहते थे जिनका कार्य गाय को मारने का था । एक दिन जब गाय प्रतिदिन की तरह उस स्थान पर दूध देने के लिए गयी तो मौका का फायदा उठाते हुए उन लोगों ने उस गाय की हत्या कर दी ।

इस घटना से गाय के मालिक को बहुत आघात पहुंचा । उनाव से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दतिया के राजा नरेश रावराजा को इस घटना के बाद रात को सूर्य देवता का सपना आया । उस सपने में सूर्य देवता ने उन्हें उस स्थान पर खुदाई करने का आदेश दिया । सूर्य देवता की आज्ञा से राजा ने उस स्थान पर खुदाई करवाना शुरू कर दिया । खुदाई के दौरान उस स्थान से सूर्य देवता की एक सुन्दर मूर्ति प्राप्त हुई । राजा ने उस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, यह मंदिर ही आज बालाजी मंदिर के नाम से प्रसिद् है । राजा के द्वारा इस मंदिर की देखरेख व पूजा अर्चना का दायित्व गाय के मालिक को ही दे दिया गया ।

इस कारण यह भारत का एक मात्र मंदिर है, जिसमें मंदिर की देखभाल व अन्य कार्य एक काछी समाज के व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है । वर्तमान समय में भी उस व्यक्ति के वंशजो के द्वारा ही इस मंदिर का का रख रखाव व पूजा की जा रही है । सूर्य देवता के दर्शन के लिए यंहा पर बहुत बड़ी मात्रा में भक्त आते है । 

मंदिर परिसर –

उन्नाव का सूर्य मंदिर अपनी बनावट के कारण मध्यप्रदेश में प्रसिद् है । इस मंदिर में सूर्य देवता के अलावा भी कई छोटे मंदिर है पर सूर्य देवता का मंदिर प्रमुख है । सूर्य देवता की मूर्ती काले ईंटो के समतल पर ढकी हुई स्थापित है, जिसमे इनका केवल मुख ही दिखाई देता है । इनकी मूर्ती में 21 त्रिभुज सूर्य के 21 चरणों को प्रदर्शित करते है । कहा जाता है की यह मंदिर भारत का एक अकेला ऐसा मंदिर है जंहा पर सूर्य देवता का यंत्र स्थापित किया गया है | इस स्थान पर प्रत्येक रविवार को मुख्य दिन माना जाता है और मेले का आयोजन भी करवाया जाता है । मंदिर के ठीक सामने की तरफ पहुंच नामक नदी प्रवाहित होती है । मंदिर पूर्ण रूप से राजाओं के समय की सुंदरता को प्रदर्शित करता है। यह मंदिर दतिया और झाँसी सड़क मार्ग में सुरभ्य पहाडियों में स्थित है। इस कारण सूर्य मंदिर पर सूर्योदय की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भग्रह में स्थित मूर्ती पर पड़ती है।

घी के कुएं –

इस मंदिर का निर्माण लगभग 16 वीं शताब्दी में कराया गया था। इस मंदिर के निर्माण के बाद ही यंहा पर एक अखण्ड ज्योति को प्रज्वलित किया गया, यह ज्योति आज भी प्रज्वलित है । ऐसा माना जाता है कि यह ज्योति लगभग 400 वर्षों से लगातार जल रही है । इस ज्योति को प्रज्वलित रखने के लिए शुद् घी का प्रयोग किया जाता है । प्रत्येक भक्त के द्वारा इस ज्योति को न बुझने देने के लिए घी का अर्पण किया जाता है । इस ज्योति को एक दिन में 8 किलोग्राम शुद् घी की आवश्यकता रहती हैं ।

मंदिर समिति के अनुसार प्रतिदिन भक्तो के द्वारा यंहा पर लगभग 20 से 22 किलोग्राम घी का अर्पण किया जाता है जिसकी मात्रा रविवार को बढ़ जाती है । इस प्रकार उपयोग के बाद भी प्रतिदिन घी शेष रह जाता है । इस शेष घी को एकत्रित कर लिया जाता है । वर्तमान स्थिति में मंदिर परिसर में 4 से 5 कुएं शुद् घी से पूर्ण रूप से भरे हुए है।

मंदिर से जुड़ी मान्यताएं –

ऐसा माना जाता है यदि आपकी किसी भी प्रकार की त्वचा संबधी परेशानी का हल इस मंदिर पर हो सकता है । यदि आपको इस प्रकार की कोई समस्या है तो आपको 5 रविवार इस मंदिर पर आकर पंहूच नदी मे स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पण करने के पश्चात मंदिर में स्थित सूर्य देवता के दर्शन करने चाहिए। ऐसा करने से आपको त्वचा संबधी समस्या से छुटकारा प्राप्त हो जाता है ।  माना जाता है कि यंहा आने वाले निःसतांन दंपत्तियों को संतान का सुख प्राप्त हो जाता है। यंहा पर प्रत्येक आषाढ़ शुल्क एकादशी को रथयात्रा का आयोजन किया जाता हैं, इस समय पर आने पर आपकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

मंदिर पहुँचने का तरीका –

वायु मार्ग द्वारा – उन्नाव पहुँचने के लिए वायु मार्ग की व्यवस्था नहीं है | आप नजदीकी एअरपोर्ट ग्वालियर पहुंचकर वंहा से बस के द्वारा दतिया या झाँसी पहुँचकर बस या टैक्सी द्वारा उन्नाव जा सकते है |

रेल मार्ग द्वारा – आप ट्रेन द्वारा झाँसी या दतिया आ करके बस या टैक्सी से उन्नाव जा सकते है |

सडक मार्ग द्वारा – सडक मार्ग द्वारा आप झांसी या दतिया पहुंचकर उन्नाव जा सकते है |

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Sushant Mohite

I’m a professional Cyber Security Consultant & Web Developer with 15 years of experience. | Director of EQUITEOS INFOTECH PRIVATE LIMITED | IT Consultant @ HPN Marathi News | Active Member @ Digital Media Editor Journalist Association Maharashtra | Legal Advisor @ The Maharashtra Media Persons and Media Institutions | Former Cyber Security Consultant @ Cyber Crime Pune| Former Cyber Security Consultant @ MAC Delhi | Co-Owner @ Dainik Shodh Marathi ( DS Marathi)

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