भगवान काल भैरव मंदिर उज्जैन की मान्यता – Kaal Bhairav

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भगवान काल भैरव मंदिर उज्जैन की मान्यता – Kaal Bhairav

भगवान काल भैरव मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन महाकाल की नगरी में महाकाल मंदिर से लगभग 5 किमी दूर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित 6000 साल पुराना प्राचीन मंदिर है | माना जाता है की पहला काल भैरव के मंदिर का निर्माण भद्रसेन राजा ने करवाया था जिसका प्रमाण स्कन्द पुराण के अवन्ती खंड में मिलता है | कालभैरव के इस मंदिर की सबसे ख़ास बात यह है की इस मंदिर में भगवान् को शराब का प्रसाद अर्पित किया जाता है और काल भैरव साक्षात रूप से इस प्रसाद का सेवन करते हैं | मान्यतानुसार भगवान् काल भैरव सभी मनोकामनाओं को पूरा करते है, यहाँ दर्शन और पूजन करने से मुकदमे में विजय, संतान सुख, शत्रु वाधा से मुक्ति और मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है |

भगवान् काल भैरव मंदिर –

भगवान् कालभैरव के मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो यह मंदिर लगभग 6 हजार साल पुराना एक वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर है | वाम मार्गी मंदिर वह मंदिर होते है जिनमे प्रसाद के रूप में माँस, मदिरा, बलि आदि को अर्पित किया जाता है | प्राचीन समय में इस मंदिर में सिर्फ तांत्रिको को ही आने की अनुमति थी और वो लोग यहाँ आकर तांत्रिक क्रियाये करते थे | कुछ समय बाद यह मंदिर आम लोगो के लिए खोल दिया गया | मंदिर के आम लोगो के लिए खुलने के बाद भी यहाँ बलि चढाई जाती थी मगर अब बलि चडाने की प्रथा को बंद कर दिया गया है |

आरती का समय व् प्रसाद –

भगवान् काल भैरव के इस मंदिर में प्रतिदिन दो बार आरती सुबह 8:30 पर व् रात में
8:30 पर की जाती है | काल भैरव के मंदिर में रविवार के दिन का विशेष महत्व होता है इस दिन यहाँ आने वाले श्रधालुओं की संख्या बहुत बढ़ जाती है | भक्तो द्वारा यहाँ पर प्रसाद के रूप में नारियल, फल और शराब के साथ साथ मुकदमे में विजय प्राप्त होने पर मेवे के लड्डू व् संतान सुख प्राप्त होने पर बेसन के लड्डू का प्रसाद अर्पित किया जाता है |

प्रमुख आकर्षण प्रज्ज्वलित दीपस्तंभ –

काल भैरव के मंदिर की एक विशेषता यहाँ पर भक्तो द्वारा प्रज्ज्वलित दीपस्तंभ की दीपमलिकाएं हैं | किसी मनोकामना की पूर्ती के लिए इस मंदिर में दीपस्तंभ पर दीप जलाने से वह मनोकामना पूर्ण हो जाती है | भक्तो के द्वारा अपनी मनोकामना के आधार पर यहाँ दीप जलाये जाते है जैसे शीघ्र विवाह के लिए दीपस्तंभ का पूजन, शत्रु वाधा से मुक्ति के लिए सरसों के तेल का दिया और मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए चमेली के तेल का दिया जलाया जाता है |

भगवान् की पगड़ी से जुडी कहानी –

सन 1761 में पानीपत के युद्ध में मराठाओं की पराजय के बाद उस समय के मराठों के राजा महादाजी सिंधिया ने विजय और राज्य की पुनर्स्थापना की कामना के साथ अपनी पगड़ी भगवान् के चरणों में रख दी थी | भगवान् के आशीर्वाद से उन्होंने हर युद्ध में विजय प्राप्त की इसके बाद उन्होंने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया | तभी से भगवान को मराठा पगड़ी अर्पित की जाने लगी जो आज भी हर साल ग्वालियर के सिंधिया परिवार द्वारा अर्पित की जाती है |

स्कंद पुराण में मंदिर से जुडी कहानी – काल भैरव मंदिर

इस मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी बताते हैं की मंदिर की मान्यता और महत्व का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है | कहा जाता है की भगवान् ब्रह्मा ने जब चारों वेदों की रचना पूर्ण करली तब उन्होंने पांचवे वेद की रचना को प्रारंभ किया जिससे उन्हें रोकने के लिए सभी देवता एकत्रित होकर ब्रह्मा जी के पास गए मगर वे नहीं माने | तब सभी देवता भगवान् शंकर के पास गए और पूरा वृतांत कह सुनाया तब भगवान् शंकर से अपने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को उत्पन्न किया | इस उग्र और क्रोधी स्वाभाव के बालक ने ब्रह्मा जी के पांचवे शीश को काटकर अलग कर दिया |

इस ब्रह्म हत्या के पाप से बचने के लिए बटुक भैरव कई स्थानों पर गए मगर उन्हें मुक्ति नही मिली | इसके बाद बटुक भैरव ने भगवान् शंकर की तपस्या की और इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा | भगवान शंकर ने बटुकभैरव को बताया की उन्हें उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे पर बने ओखर शमशान में तपस्या करने से ही इस पाप से मुक्ति मिलेगी | भगवान् बटुकभैरव के यंहा तपस्या करने की वजह से यंहा पर काल भैरव की पूजा तभी से होती आ रही है | आज तो यंहा पर भगवान् काल भैरव का विशाल मंदिर बना हुआ है जिसका जीर्णोद्धार परमार वंश के राजाओ द्वारा करवाया गया था |

मंदिर परिसर – काल भैरव मंदिर

इस मंदिर में भगवान् काल भैरव की प्रतिमा के ठीक सामने एक झूले में भगवान् बटुक भैरव की प्रतिमा स्थापित है और मंदिर की बाहरी दीवारों पर दूसरे देवी देवताओं की मूर्तियाँ लगी हुई हैं | इस मंदिर के ठीक उत्तर दिशा की तरफ एक गुफा स्थापित है इसे पाताल भैरवी के नाम से जाना जाता है |

अर्पित शराब कहाँ जाती है – काल भैरव मंदिर

भगवान् काल भैरव को शराब का प्रसाद लगाने की प्रथा आज भी चल रही है और यह कोई नहीं जानता है की यह प्रथा कब, कैसे और किसने शुरू की कोई नहीं जानता है | इस मंदिर से जुडी एक कथा प्रचलित है की बहुत समय पहले एक अंग्रेज अधिकारी ने इस बात का पता लगाने के लिए जांच करवाई थी की इस मंदिर में भगवान् को पिलाई जाने वाली शराब जाती कहाँ है | भगवान् की मूर्ती के आसपास खुदाई भी करवाई गयी मगर फिर भी किसी तरह का परिणाम नहीं मिला | भगवान् के मंदिर के इस रहस्य को देखकर वह अधिकारी भी भगवान् काल भैरव का भक्त बन गया |

भगवान काल भैरव से जुड़े कुछ तथ्य –

  • भगवान् कालभैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है |
  • कहा जाता है की भगवान् ब्रह्मा के पांचवे शीश का खंडन भगवान् कालभैरव ने ही किया था |
  • भगवान् कालभैरव को भगवान् शंकर का उग्र और तेजस्वी स्वरुप माना जाता है |
  • सभी प्रकार के पूजन और हवन में रक्षा के लिए इनका पूजन किया जाता है |

मंदिर पहुँचने का तरीका –

आप कालभैरव मंदिर उज्जैन आसानी से वायु मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग द्वारा पहुँच सकते हैं –

वायु मार्ग द्वारा – वायु मार्ग द्वारा उज्जैन पहुँचने के लिए आपको इंदौर एयरपोर्ट पर जाना होगा वंहा से 55 किमी दूर उज्जैन आप बस या ट्रेन द्वारा जा सकते है |

रेल मार्ग द्वारा – देश के प्रमुख शहरो से आप रेल मार्ग द्वारा आसानी से उज्जैन आ सकते हैं |

सडक मार्ग द्वारा – देश के प्रमुख शहरों द्वारा आप आसानी से सडक मार्ग द्वारा उज्जैन आ सकते हैं |

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Sushant Mohite

I’m a professional Cyber Security Consultant & Web Developer with 15 years of experience. | Director of EQUITEOS INFOTECH PRIVATE LIMITED | IT Consultant @ HPN Marathi News | Active Member @ Digital Media Editor Journalist Association Maharashtra | Legal Advisor @ The Maharashtra Media Persons and Media Institutions | Former Cyber Security Consultant @ Cyber Crime Pune| Former Cyber Security Consultant @ MAC Delhi | Co-Owner @ Dainik Shodh Marathi ( DS Marathi)

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